ज़कात कैसे कैलकुलेट करें और किन चीज़ों पर वाजिब होती है और कैसे अदा करे? कैलकुलेटर नीचे दिया हुआ है
(नोट – यह कैलकुलेटर कुरआन और हदीस के मुताबिक और उलेमा ए किराम की तहकीक के मुताबिक बनाया गया है। साल 2018 में हाजी मुहम्मद अवेस सैयद द्वारा तैयार की गई एक्सल शीट का यह डिजिटल रूप है। यदि इसमें कोई मसअला या खामी हो तो आप अपना सुझाव paigamesaiyed@gmail.com पर ईमेल कर सकतें हैं।)
इस्लाम में ज़कात हर उस मुसलमान पर फ़र्ज़ है जो मालिक-ए-निसाब है और जिस पर एक साल पूरा हो चुका हो। यानी अगर आपके पास निसाब की मात्रा से ज़्यादा धन-संपत्ति एक इस्लामी साल (हिजरी साल) तक बनी रहती है, तो आपको उसकी ज़कात देनी होगी।
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1. ज़कात किन चीज़ों पर वाजिब होती है?
ज़कात सिर्फ़ सोना, चांदी और नकद पैसे पर ही नहीं, बल्कि दूसरी क़ीमती संपत्तियों पर भी होती है।
A) सोना, चांदी, नकद पैसा, बैंक बैलेंस, सेविंग्स, डिजिटल वॉलेट, फिक्स्ड डिपॉज़िट (FD), शेयर, स्टॉक्स या म्युचुअल फंड में इन्वेस्ट SIP किया है तो उनके बाज़ार भाव निकाल ले, प्रोविडेंट फंड (PF, EPF), बचत प्रमाण पत्र, पूंजी निवेश और सभी प्रकार के इन्वेस्टमेंट और जमा पूंजी का कुल हिसाब लगाएं।
अगर ये कुल रकम सोने के निसाब से ज़्यादा है और उस पर एक साल पूरा हो चुका है, तो आपको ज़कात देनी होगी।
B) बिज़नेस का माल (व्यापार की संपत्ति, माले तिजारत)
अगर आप कोई कारोबार कर रहे हैं, तो जो भी माल-ए-तिजारत (बिक्री के लिए रखा गया सामान) है, उस पर भी ज़कात देनी होगी। माल, जो बेचने के लिए लिया जाता हो (कोई भी भंडार, कंप्यूटर, मोबाइल, घरेलू उपकरण, कपड़े, चिकित्सा, किराने, आदि) (प्लॉट, गोडाउन, हाउस, शॉप अगर व्यापार के लिए लिया जाये, ज़मीन जायदाद का कारोबार) (कार, टैक्सियां और अन्य वाहन अगर व्यापार के लिए लिये जाये, बिक्री के लिए लिया हो)
अगर कोई प्रॉपर्टी बेची जाने के इरादे से खरीदी गई है, तो उसकी भी ज़कात देनी होगी। और अगर उसको किराए पे दी गई हैं तो उसकी आमदनी पर जकात होगी।
C) कर्ज़ (उधार दिया गया पैसा)
अगर आपने किसी को पैसा उधार दिया है और आपको वापस मिलने की उम्मीद है, तो उस पर भी ज़कात वाजिब होगी। और अगर सामने वाला लंबे समय से आपको वादा खिलाफी करता हो और आपको अंदेशा हो के ये आपको कर्ज वापस नहीं करेगा तो उस माल पर जकात नहीं है। जब आपकी मिल्कियत में वापस आजाए तब निकाल नी होगी।
D) लॉन (होम लॉन, बिजनेस लोन, पर्सनल लोन वगैरह)
बहुत से लोग बड़ी बड़ी लॉन बैंक से लिए हुए होते हैं जो 5,10,15,20 सालों तक चलती हैं l और उनके पास निसाब का माल भी होता है तो वो जकात नहीं निकालते जो बिलकुल गलत है। अगर लाखों करोड़ों की लॉन लिए हुए हैं तो आपको उसका हिसाब कुछ ऐसे निकालना है कि साल भर का EMI हफ्ता का हिसाब लगा के उसको निसाब में से कम करदे अगर बचा हुआ माल निसाब तक है तो जकात निकाले।
जैसे के आपका कुल माल 18 लाख रुपए हुआ जो के निसाब के मुताबिक है। अब आपका EMI महीने का कुछ 20 हजार है यानी साल का 2 लाख 40 हज़ार हुआ। इसको कुल माल यानी 18 लाख से कम कीजिए तो बनेगा 15 लाख 60 हजार रुपए जो निसाब के मुताबिक है तो अब आपको इस रकम पर जकात देनी होगी।
E) जानवरों और खेती, फसलों पर ज़कात
अगर आपके पास बड़ी संख्या में ऊँट, गाय, भेड़-बकरी हैं, तो इस्लामी नियमों के अनुसार उनकी भी ज़कात होती है।
खेती की ज़मीन से होने वाली पैदावार पर भी ज़कात होती है।
(इनका निसाब इंशा अल्लाह किसी ओर पोस्ट में जिक्र करेंगे)
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2. ज़कात निकालने का आसान तरीका
जिस दिन आप जकात का हिसाब लगाएं उस दिन का सोने का रेट निकाल लें।
10g of 24k gold (99.9%) in Ahmedabad is
1,67,640.00 Indian Rupee – 16746 Rupees per Gram of 24k Gold
24 कैरेट के हिसाब से निसाब 12 लाख 57 हजार तक approx है।
यानी आपका वो माल जिसपर जकात वाजिब है वह अगर 12 लाख 57 हजार और उस से ज्यादा हैं तो आप मालिके निसाब हैं।
ज़कात की दर: 2.5% (यानि कुल माल का 1/40 हिस्सा)
चरण 1: कुल ज़कात के योग्य संपत्ति की गणना करें
इसमें शामिल करें: नकद पैसा (घर में, बैंक में) सोना कुल वजन (ग्राम) चांदी कुल वजन (ग्राम) शेयर और सभी प्रकार के इन्वेस्टमेंट उधार दिया गया पैसा माले तिजारत
इन चीजों को शामिल न करें: रोज़मर्रा की ज़रूरत की चीजें (जैसे घर, कार, फर्नीचर, TV, फ्रिज, ऐसी, कपड़े वगैरह) पर्सनल इस्तेमाल का घर और गाड़ी
नीचे दिए गए कैलकुलेटर में सोना चांदी का वजन (ग्राम में) डाले और करेंट मार्केट वैल्यू डालें।
कुल सेविंग्स और सभी प्रकार के इन्वेस्टमेंट की टोटल वैल्यू डालें
Other assets में माले तिजारत का टोटल वैल्यू डालें
Calculate Zakat बटन पर क्लिक करें। कुल जमा राशि ओर उसकी जकात कितनी अदा करनी है उसका हिसाब आपको मिल जाएगा।
Zakat Calculator
Zakat Calculator
3. ज़कात किन लोगों को दी जा सकती है?
क़ुरआन (सूरह तौबा 9:60) के अनुसार ज़कात 8 किस्म के लोगों को दी जा सकती है:
1. गरीब (जो निसाब से नीचे हैं)
2. मिस्कीन (अत्यधिक जरूरतमंद)
3. ज़कात इकट्ठा करने वाले लोग
4. नये मुसलमान (जिनकी आर्थिक मदद से उनका ईमान मज़बूत हो)
5. गुलामों को आज़ाद कराने में
6. कर्ज़दारों की मदद के लिए
7. अल्लाह के रास्ते में
8. मुसाफ़िर (जो सफ़र में जरूरतमंद हो)
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4. ज़कात कब और कैसे दें?
ज़कात एक इस्लामी साल (हिजरी साल) पूरा होने के बाद देना ज़रूरी है।
इसे एक बार में या टुकड़ों में भी दिया जा सकता है। जब नीयत करें ओर जितनी जकात निकल रही है उसमें जितना हो सके उतना अदा करे और बाकी का जल्द से जल्द अदा करने की कोशिश करें।
अगर संभव हो, तो रमज़ान के महीने में देना बेहतर है क्योंकि इसका सवाब बढ़ जाता है।