हर ज़कात अदा करने वाले के मन में एक सवाल होता है: ज़कात किसे दें?
जब आप अपने माल की ज़कात अदा करें तो सबसे पहले ज़कात के हक़दारों में से अपने क़रीबी रिश्तेदारों को देखें। अगर उनमें कोई ज़रूरतमंद हो तो उसे ज़कात देना सबसे बेहतर है।
इसके बाद अपने जान-पहचान वालों, पड़ोसियों, और अपने मोहल्ले, शहर या गाँव के ज़रूरतमंद लोगों की मदद करें।
फिर ऐसी भरोसेमंद तंज़ीमों (संस्थाओं) को ज़कात दें जो सीधे तौर पर ज़रूरतमंद लोगों की मदद करती हैं, जैसे पैग़ाम-ए-सैय्यद चैरिटेबल ट्रस्ट। हमारे पास पूरे साल मदद की पुकार आती रहती है, जैसे:
– ग़रीब बच्चों की स्कूल फीस, यूनिफ़ॉर्म और किताबों के लिए – मेडिकल इमरजेंसी, दवाइयों या ऑपरेशन के खर्च के लिए – किसी मजबूर इंसान के छोटे-मोटे कर्ज़ की अदायगी के लिए – किसी को छोटा कारोबार शुरू कराने में मदद (जैसे लारी, पैडल रिक्शा, दुकान का सामान) – किसी कारीगर को उसके काम के औज़ार दिलाने के लिए – किसी ग़रीब बेटी की शादी में मदद के लिए
इनके बाद आप अपनी ज़कात मदरसों और दारुल उलूम को भी दे सकते हैं।
⚠️ एक अहम बात याद रखें: अपनी ज़कात हरगिज़ ऐसे पेशेवर भिखारियों को बड़ी रकम देकर ज़ाया न करें, जिन्होंने भीख माँगना ही अपना पेशा बना लिया है।
बल्कि अपनी ज़कात उन हक़दार और शरीफ़ लोगों तक पहुँचाएँ जो अपनी इज़्ज़त की वजह से लोगों के सामने हाथ नहीं फैलाते, लेकिन वास्तव में मदद के मुहताज होते हैं।
आपकी ज़कात किसी की ज़िंदगी में ईद की खुशियाँ ला सकती है।